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सूरत कलेक्टर धवल पटेल ने प्राइवेट अस्पतालों को कहा कि आप जहां सेऑक्सीजन ले रहे वहीं से लें हम कुछ नहीं कर सकते

सूरत कलेक्टर धवल पटेल ने प्राइवेट अस्पतालों को कहा कि आप जहां सेऑक्सीजन ले रहे वहीं से लें हम कुछ नहीं कर सकते

सूरत कलेक्टर धवल पटेल ने प्राइवेट अस्पतालों को कहा कि आप जहां सेऑक्सीजन ले रहे वहीं से लें हम कुछ नहीं कर सकते
सूरत कलेक्टर धवल पटेल
सूरत कलेक्टर धवल पटेल
सूरत शहर अप्रैल 28: कोरोना महामारी से गुजरात के सूरत जिले में कोहराम मचा हुआ है। सभी कोविड हॉस्पिटल कोरोना मरीजों फुल हैं। बीते रविवार की रात यहां आयुष अस्पताल में आग लगने की वजह से 45 कोरोना मरीजों की जान चली गई। इसके अलावा कोरोना से करीब दो दर्जन मौतें हो रही हैं। अस्पतालों में आॅक्सीजन की भी किल्लत मची है। सप्लाई में रुकावट आई तो कहीं से भी ऑक्सीजन मिलने की संभावना नहीं है। संकट के ऐसे समय में सूरत के जिला कलेक्टर धवल पटेल ने कहा कि, आप जहां से ऑक्सीजन ले रहे, वहीं से लें, हम कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि, इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव जयंती रवि ने भी कहा कि सूरत में ऑक्सीजन की कमी से बने हालात बहुत क्रिटिकल हैं।रवि ने कहा कि, हम ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के प्रयास कर रहे हैं। वहीं, मंगलवार को कलेक्टर धवल पटेल ने कहा कि, प्राईवेट अस्पतालों को अब ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनियों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा, क्योंकि दूसरा कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है। बीते रोज की ही बात है- एक प्राईवेट अस्पताल ने कहा कि अगर ऑक्सीजन खत्म हो गई तो वे मरीजों को सिविल या स्मीमेर अस्पताल भेज देंगे। वहीं, एक अस्पताल ने आशुतोष अस्पताल को ऑक्सीजन पहुंचाई।
सूरत के ज्यादातर प्राईवेट अस्पतालों के मालिकों का कहना है कि, उनके पास 8 से 12 घंटे की ऑक्सीजन बच ही पा रही है। ऐसे में अस्पताल हर समय ऑक्सीजन कंपनियों के संपर्क में हैं। यदि टाइम पर ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाई तो समस्या बढ़ जाएगी। दूसरी तरफ सरकार की ओर से बताया गया कि, ऑक्सीजन की समस्या को देखते हुए गांधीनगर में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है।
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