मुहर्रम
मुहर्रम

अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने इस मास को अल्लाह का महीना कहा है। साथ ही इस मास में रोजा रखने की खास अहमियत बयान की है।मुख्तलिफ हदीसों, यानी हजरत [[मुहम्मद (सल्ल.) के कौल (कथन) व अमल (कर्म) से मुहर्रम की पवित्रता व इसकी अहमियत का पता चलता है। ऐसे ही हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने एक बार मुहर्रम का जिक्र करते हुए इसे अल्लाह का महीना कहा। इसे जिन चार पवित्र महीनों में रखा गया है, उनमें से दो महीने मुहर्रम से पहले आते हैं। यह दो मास हैं जीकादा व जिलहिज्ज।
एक हदीस के अनुसार अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने कहा कि रमजान के अलावा सबसे उत्तम रोजे वे हैं, जो अल्लाह के महीने यानी मुहर्रम में रखे जाते हैं। यह कहते समय नबी-ए-करीम हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने एक बात और जोड़ी कि जिस तरह अनिवार्य नमाजों के बाद सबसे अहम नमाज तहज्जुद की है, उसी तरह रमजान के रोजों के बाद सबसे उत्तम रोजे मुहर्रम के हैं।

हज़रत अबू क़तादा कहते हैं कि पैगंबर s.a.w ने कहा: मुझे आशा है कि अशूरा के दिन का उपवास पिछले वर्ष के पापों का प्रायश्चित करेगा।
इन हदीसों से स्पष्ट है कि अशूरा का दिन बहुत ही पवित्र होता है। इसलिए हमें इस दिन के आशीर्वाद का भरपूर लाभ उठाना चाहिए।

आशूरा दिवस का ऐतिहासिक महत्व

आशूरा बहुत महत्व और महानता का दिन है, इतिहास की महान घटनाएं इससे जुड़ी हैं; इतिहासकारों ने लिखा है कि:
(२) आशूरा के दिन ही, आकाश और पृथ्वी, कलम और आदम (उस पर शांति हो) बनाए गए थे।
(२) उसी दिन, हज़रत आदम (PBUH) का पश्चाताप स्वीकार किया गया था।
(२) उसी दिन, हज़रत इदरीस (अ) को स्वर्ग में ले जाया गया।
(२) उसी दिन, पैगंबर नूह કી‌ કશતી को भयानक बाढ़ से बचाया गया और जूडी પહાર‌ ઠહરાયા‌ ગયા
(२) उसी दिन, हज़रत इब्राहिम (अ) को “ख़लीलुल्लाह” बनाया गया और‌ ‌ઉન કો આગ‌‌ મેં ડાલા‌ ગયા.
(२) उसी दिन हज़रत इस्माइल (अ.स.) का जन्म हुआ था।
(२) उसी दिन, हज़रत यूसुफ (अ) को जेल से रिहा कर दिया गया और उन्हें मिस्र की सरकार मिल गई।
(२) उसी दिन, हज़रत यूसुफ (अ) लंबे समय के बाद हज़रत याकूब (अ) से मिले।
(२) उसी दिन, पैगंबर मूसा और‌ ‌ઉન કે‌ लोग બનુ ઈસરાઈલ को फिरौन के अत्याचार से बचाया गया था।

(१) उसी दिन, हज़रत सुलेमान (अ.स.) को राज्य वापस कर दिया गया।
(२) उसी दिन हज़रत अयूब (अ) एक गंभीर बीमारी से ठीक हो गए थे।
(२) उसी दिन, हज़रत यूनुस (अ) को एक मछली के पेट में चालीस दिनों तक रहने के बाद निष्कासित कर दिया गया था।
(२) उसी दिन हज़रत यूनुस (अ.) के लोगों की तौबा स्वीकार कर ली गई और उनसे यातना टल गई।
(२) उसी दिन यीशु (pbuh) का जन्म हुआ था।
(२) और उसी दिन यीशु को यहूदियों की बुराइयों से बचाया गया और उसे स्वर्ग में ले जाया गया।
(२) उसी दिन संसार पर दया की पहली वर्षा हुई।
(२) उसी दिन कुरैशी काबा को नए कफन से ढक देते थे।
(२) उसी दिन, पवित्र पैगंबर (sws) ने हजरत खदीजा अल-कुबरा (आरए) से शादी की।
(२) उसी दिन, धोखेबाजों ने कर्बला के मैदान में पवित्र पैगंबर (sws) की पोती और फातिमा (रा) के कलेजे को शहीद कर दिया।
(نزهة المجالس /۳۴۷ ع معارف القرآن ت ۹۸. معارف الحدیث /۱۶۸)
आशूरा दिवस पर करने के કામ

अशूरा के दिन हदीसों से केवल दो बातें सिद्ध हुई हैं: (१) उपवास: जैसा कि इस संबंध में बताया गया है।…
(२) परिवार પર ખર્ચા‌ જ્યાદા કરના : इस्लाम‌ ने उस दिन के लिए एक और शिक्षा दी है कि इस दिन अपने परिवार के लिए खाने-पीने का विस्तार करना अच्छा है; क्योंकि इस क्रिया के आशीर्वाद से, सर्वशक्तिमान अल्लाह साल भर જ્યાદા માત્રા મેં जीविका के द्वार खोलता है। इस प्रकार: हज़रत अबू हुरैरा से वर्णित है कि पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा: जो कोई भी आशूरा के दिन अपने परिवार ખાને પીને મે विस्तार करता है, अल्लाह पूरे वर्ष ઉસ પર રીઝક કા विस्तार करेगा।

અલ્લાહ हम सभी को ઇસ્લામ धर्म की सही समझ प्रदान करें, और हमें सभी प्रकार के पापों और अपराधों से बचाएं, और हमें हमारे प्यारे पवित्र पैगंबर (PBUH) के सच्चे प्यार और आज्ञाकारिता કી તૌફીક‌ આતા ફરમા‌એ.

रिपोटर अजाज कंधार surat gujrat

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